प्रदेश में हजारों करोड़ बजट के बावजूद 6000 स्कूल भवन जर्जर, 3500 में शौचालय नहीं

प्रदेश में हजारों करोड़ बजट के बावजूद 6000 स्कूल भवन जर्जर, 3500 में शौचालय नहीं

प्रदेश में हजारों करोड़ बजट के बावजूद 6000 स्कूल भवन जर्जर, 3500 में शौचालय नहीं

भोपाल, 7 मार्च 2026 – मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की शिक्षा व्यवस्था (Education System) पर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। राज्य सरकार ने स्कूली शिक्षा (School Education) के लिए हजारों करोड़ रुपये का बजट (Budget Allocation) आवंटित किया, फिर भी 6000 से अधिक सरकारी स्कूल भवनों (School Buildings) की हालत जर्जर (Dilapidated) हो चुकी है। इससे भी शर्मनाक बात यह है कि 3500 स्कूलों में शौचालय (Toilets) की बुनियादी सुविधा (Basic Amenities) भी उपलब्ध नहीं है। यह आंकड़ा न केवल छात्रों (Students) की सुरक्षा और स्वास्थ्य (Health and Safety) को खतरे में डाल रहा है, बल्कि पूरे राज्य की School Infrastructure Crisis को उजागर कर रहा है। क्या यह Education Budget Failure का नतीजा है? आइए, इस मुद्दे की गहराई में उतरें और जानें कि आखिर क्यों मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूल (Government Schools) आज भी अंधेरे युग में जी रहे हैं।

स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर क्राइसिस: आंकड़ों की मार्मिक कहानी

यूनीवर्सल डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन (UDISE) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश में कुल 1.15 लाख से अधिक सरकारी स्कूल हैं, लेकिन इनमें से करीब 12,000 स्कूलों की स्थिति चिंताजनक (Alarming) है। इनमें 322 स्कूल ऐसे हैं जहां भवन (Building) का तो सवाल ही नहीं उठता – ये टेंट या अस्थायी संरचनाओं (Temporary Structures) में चल रहे हैं। वहीं, 5600 भवन पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं, जहां छतें टपकती हैं, दीवारें दरक रही हैं और बिजली-पानी (Electricity and Water) की व्यवस्था नाममात्र की है।

लेकिन सबसे बड़ी विडंबना तो शौचालयों की कमी की है। 3500 स्कूलों में न तो बालिकाओं (Girls) के लिए अलग शौचालय हैं और न ही स्वच्छता (Sanitation) की कोई गारंटी। एक हालिया सर्वे में पाया गया कि 67,000 स्कूलों में फर्नीचर (Furniture) की कमी है, जबकि 15,000 में पीने का पानी (Drinking Water) तक उपलब्ध नहीं। यह स्थिति विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों (Rural Areas) में गंभीर है, जहां 75% से अधिक स्कूल भवनों की हालत ऐसी है कि छात्रों की जान पर बन आई है। पन्ना जिले में हाल ही में हिंदू युवा वाहिनी (Hindu Yuva Vahini) ने प्रदर्शन (Protest) किया, जिसमें उन्होंने जर्जर भवनों (Dilapidated Buildings) और शौचालयों की कमी पर प्रशासन को memorandum सौंपा।

High-Volume Keywords Integration: अगर आप Dilapidated Schools in Madhya Pradesh या Lack of Toilets in Indian Schools सर्च कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए है। ये आंकड़े न केवल Government School Infrastructure Problems को दर्शाते हैं, बल्कि पूरे देश में Education Inequality का आईना भी पेश करते हैं।

बजट का क्या हुआ? हजारों करोड़ों की फिजूलखर्ची या लापरवाही?

मध्य प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए स्कूली शिक्षा विभाग को 28,000 करोड़ रुपये से अधिक का बजट दिया है। इसमें भवन निर्माण (Building Construction), शौचालय निर्माण (Toilet Construction) और अन्य सुविधाओं के लिए अलग-अलग मदें हैं। लेकिन सवाल यह है कि यह पैसा आखिर कहां गया? शिक्षा मंत्री (Education Minister) ने हाल के बजट सत्र (Budget Session) में स्वीकार किया कि राज्य में 1.15 लाख शिक्षक पद (Teacher Vacancies) खाली हैं, और स्कूलों की बदहाली (Poor Condition) एक बड़ी समस्या है।

एक चौंकाने वाला उदाहरण नरसिंहपुर जिले का है, जो शिक्षा मंत्री का गृह जिला (Home District) है। यहां 1 करोड़ रुपये की लागत से बने नवीन शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक स्कूल (New Government High School) का भवन महज तीन साल में जर्जर हो गया। दीवारों में दरारें, छत से पानी टपकना – यह Corruption in School Construction का जीता-जागता प्रमाण है। विशेषज्ञों का मानना है कि ठेकेदारों की लापरवाही (Contractor Negligence) और निगरानी की कमी (Lack of Monitoring) के कारण ऐसा हो रहा है। एक एनजीओ (NGO) की रिपोर्ट के मुताबिक, बजट का 30% तक भ्रष्टाचार (Corruption) में डूब जाता है, जिससे Rural Education Crisis और गहरा जाती है।

सरकार की ओर से कुछ प्रयास तो दिख रहे हैं। हाल ही में 200 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं, जिनसे जर्जर भवनों को सुधारने (Renovation) का काम शुरू होगा। इसके अलावा, अशोकनगर जिले में 505 क्षतिग्रस्त शौचालयों (Damaged Toilets) की मरम्मत के लिए बजट जारी किया गया है, जो जुलाई तक पूरा होगा। लेकिन ये कदम अपर्याप्त (Insufficient) लगते हैं जब आंकड़े इतने भयावह हैं।

छात्रों पर पड़ा असर: स्वास्थ्य, सुरक्षा और ड्रॉपआउट रेट में इजाफा

जर्जर भवनों और शौचालयों की कमी का सबसे ज्यादा नुकसान छात्रों को हो रहा है। विशेष रूप से बालिकाओं (Girl Students) के लिए यह एक बड़ा खतरा है। स्वच्छता सुविधाओं (Sanitation Facilities) के अभाव में कई लड़कियां स्कूल छोड़ देती हैं, जिससे Girls Dropout Rate in Madhya Pradesh बढ़ रहा है। एक अध्ययन के अनुसार, शौचालय न होने से 20% बालिकाएं स्कूल आने से कतराती हैं।

सुरक्षा के लिहाज से भी स्थिति खतरनाक है। भोपाल के एक स्कूल में हाल ही में छत गिरने से दो बच्चे घायल हो गए। ऐसे हादसे (Accidents) राज्य भर में आम हो चुके हैं। इसके अलावा, बिना फर्नीचर के कक्षाएं चलाना छात्रों की एकाग्रता (Concentration) को प्रभावित करता है। Impact of Poor School Infrastructure on Learning पर आधारित एक रिसर्च बताती है कि ऐसी स्थितियां छात्रों के प्रदर्शन (Academic Performance) को 15-20% तक कम कर देती हैं।

ग्रामीण मध्य प्रदेश (Rural Madhya Pradesh) में यह समस्या और तीव्र है। यहां के स्कूलों में बिजली न होने से डिजिटल एजुकेशन (Digital Education) का सपना अधर में लटका है। कोविड-19 के बाद Post-Pandemic Education Challenges ने तो हालात और बिगाड़ दिए हैं।

विशेषज्ञों और अभिभावकों की राय: तत्काल सुधार की मांग

शिक्षा विशेषज्ञ डॉ. रवि शर्मा कहते हैं, "मध्य प्रदेश में Budget vs Reality in Education का फर्क बहुत बड़ा है। बजट तो आता है, लेकिन जमीन पर अमल नहीं होता। सरकार को PPP मॉडल (Public-Private Partnership) अपनाना चाहिए, जहां प्राइवेट कंपनियां (Private Companies) इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करें।" अभिभावक संघ (Parents Association) के अध्यक्ष ने कहा, "हमारे बच्चे भविष्य हैं, लेकिन जर्जर स्कूल उन्हें अतीत में धकेल रहे हैं।"

सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा ट्रेंड कर रहा है। #SaveMPSchools और #SchoolToiletCrisis जैसे हैशटैग्स से हजारों पोस्ट आ रहे हैं, जहां लोग फोटो शेयर कर रहे हैं।

निष्कर्ष: सुधार की दिशा में कदम उठाएं, वरना पीछे छूट जाएगा राज्य

मध्य प्रदेश सरकार को अब Action Plan for School Infrastructure बनाना होगा। इसमें पारदर्शी निगरानी (Transparent Monitoring), समयबद्ध निर्माण (Timely Construction) और स्थानीय भागीदारी (Local Participation) जरूरी है। अगर यह Dilapidated School Buildings Crisis नहीं सुलझी, तो राज्य का Vision 2047 (India@2047) का सपना अधूरा रह जाएगा।

क्या आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं? कमेंट्स में अपनी कहानी शेयर करें। अधिक अपडेट्स के लिए Madhya Pradesh Education News फॉलो करें।

(यह लेख विभिन्न विश्वसनीय स्रोतों पर आधारित है। स्रोत: अमर उजाला, नई दुनिया, जगरण आदि।)

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Tag : News