एनसीईआरटी का नया 'स्वदेशी' मॉड्यूल: आत्मनिर्भरता की शिक्षा अब स्कूलों में

एनसीईआरटी का नया 'स्वदेशी' मॉड्यूल: आत्मनिर्भरता की शिक्षा अब स्कूलों में

Advertisement
Ads by Google ⋮
एनसीईआरटी का नया 'स्वदेशी' मॉड्यूल: आत्मनिर्भरता की शिक्षा अब स्कूलों में

नई दिल्ली, दिसंबर 2025 – राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने स्कूली शिक्षा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 'स्वदेशी' पर आधारित दो नए विशेष मॉड्यूल लॉन्च किए हैं। ये मॉड्यूल छात्रों में आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर भारत) की भावना जगाने और लोकल प्रोडक्ट्स को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं। मिडिल स्टेज (कक्षा 6-8) के लिए 'स्वदेशी: वोकल फॉर लोकल' और सेकेंडरी स्टेज (कक्षा 9-12) के लिए 'स्वदेशी: फॉर ए सेल्फ-रिलायंट इंडिया' नामक ये मॉड्यूल अब स्कूलों में लागू हो रहे हैं। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत' और 'वोकल फॉर लोकल' अभियान से प्रेरित है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी 2020) के अनुरूप है।

स्वदेशी मॉड्यूल क्या है और क्यों जरूरी?

एनसीईआरटी के इन मॉड्यूल्स में स्वदेशी आंदोलन की ऐतिहासिक यात्रा को आधुनिक संदर्भ से जोड़ा गया है। 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध में शुरू हुए स्वदेशी आंदोलन से लेकर आज के 'मेक इन इंडिया', 'स्टार्टअप इंडिया' और 'डिजिटल इंडिया' तक की कहानी को रोचक तरीके से प्रस्तुत किया गया है।

  • ऐतिहासिक संदर्भ: 1905 में कलकत्ता टाउन हॉल में घोषित स्वदेशी आंदोलन में बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय और बिपिन चंद्र पाल जैसे नेताओं ने ब्रिटिश सामान के बहिष्कार और स्वदेशी उत्पादों को अपनाने का आह्वान किया था। महात्मा गांधी ने इसे 'स्वराज की आत्मा' कहा और रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे राष्ट्र की सच्ची स्वतंत्रता का परीक्षण माना।
  • आधुनिक महत्व: मॉड्यूल में कहा गया है कि 1905 में स्वदेशी ने औपनिवेशिक शोषण से लड़ने की ताकत दी थी, वहीं 2025 में यह ग्लोबलाइजेशन और टेक्नोलॉजी के युग में आत्मनिर्भरता की दिशा दिखाता है। सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), रिन्यूएबल एनर्जी और एग्रीकल्चर जैसे क्षेत्रों में स्वदेशी नवाचार पर जोर दिया गया है।

ये मॉड्यूल छात्रों को सिखाते हैं कि स्वदेशी सिर्फ भारतीय सामान खरीदना नहीं, बल्कि भारतीय रचनात्मकता, इनोवेशन और क्षमता पर विश्वास करना है। उदाहरण के तौर पर अमूल (डेयरी), इसरो (अंतरिक्ष) और आयुर्वेद (वेलनेस) जैसे स्वदेशी ब्रांड्स को हाइलाइट किया गया है।

स्कूलों में कैसे लागू होगा?

  • मिडिल स्टेज के लिए: 'वोकल फॉर लोकल' पर फोकस, जहां रोजमर्रा की चीजों जैसे कर्नाटक के चन्नपटना खिलौने या तमिलनाडु के थंजावुर बॉबलहेड डॉल्स के जरिए लोकल क्राफ्ट्समैनशिप को बढ़ावा दिया जाएगा।
  • सेकेंडरी स्टेज के लिए: आत्मनिर्भर भारत पर गहराई से चर्चा, जिसमें कोविड-19 के दौरान कोवैक्सिन जैसी स्वदेशी वैक्सीन और भारत सेमीकंडक्टर मिशन जैसे उदाहरण शामिल हैं।

ये मॉड्यूल अतिरिक्त सामग्री के रूप में स्कूलों में इस्तेमाल होंगे। शिक्षक प्रोजेक्ट-बेस्ड लर्निंग, लोकल केस स्टडीज और कम्युनिटी एंगेजमेंट के जरिए इन्हें पढ़ाएंगे। एनसीईआरटी का मानना है कि इससे छात्रों में इनोवेशन, उद्यमिता और राष्ट्रीय गौरव की भावना मजबूत होगी।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम

प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में आत्मनिर्भरता को राष्ट्र की ताकत और गरिमा की नींव बताया था। एनसीईआरटी के ये मॉड्यूल उसी विजन को स्कूलों तक पहुंचा रहे हैं। कोरोना महामारी में भारत की स्वदेशी वैक्सीन उत्पादन क्षमता और रक्षा, अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में सफलताएं इन मॉड्यूल्स में प्रमुखता से शामिल हैं।

शिक्षाविदों का कहना है कि यह मॉड्यूल छात्रों को सिर्फ इतिहास नहीं सिखाएंगे, बल्कि उन्हें भविष्य के लिए तैयार करेंगे – जहां भारत ग्लोबल अनिश्चितताओं का सामना स्वदेशी ताकत से करेगा।

अभिभावकों और शिक्षकों के लिए सलाह

अभिभावक घर पर भी लोकल प्रोडक्ट्स को प्राथमिकता देकर बच्चों को प्रेरित कर सकते हैं। स्कूलों में ये मॉड्यूल लागू होने से शिक्षा अधिक प्रासंगिक और प्रेरणादायक बनेगी।

एनसीईआरटी की यह पहल नई शिक्षा नीति के तहत स्कूल शिक्षा को भारत-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। आने वाले वर्षों में यह छात्रों में आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव रखेगा।

कीवर्ड्स: एनसीईआरटी स्वदेशी मॉड्यूल, आत्मनिर्भर भारत शिक्षा, वोकल फॉर लोकल स्कूल, एनईपी 2020 अपडेट, स्वदेशी आंदोलन शिक्षा

(स्रोत: एनसीईआरटी आधिकारिक रिलीज और संबंधित रिपोर्ट्स, 2025)

Join Whatsapp & Telegram Job Alert Group
Advertisement
Ads by Google ⋮