नई शिक्षा नीति के तहत बोर्ड परीक्षाओं में बड़ा बदलाव: अब साल में दो बार मौका मिलेगा

नई शिक्षा नीति के तहत बोर्ड परीक्षाओं में बड़ा बदलाव: अब साल में दो बार मौका मिलेगा

नई शिक्षा नीति के तहत बोर्ड परीक्षाओं में बड़ा बदलाव: अब साल में दो बार मौका मिलेगा

29 दिसंबर 2025: भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक ऐतिहासिक बदलाव आने वाला है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षाओं को साल में दो बार आयोजित करने की घोषणा की है। यह बदलाव 2026 से लागू होगा, जिससे लाखों छात्रों को परीक्षा के तनाव से राहत मिलेगी और बेहतर प्रदर्शन का दूसरा मौका मिलेगा। आइए इस बड़े सुधार को विस्तार से समझते हैं。

NEP 2020 का यह प्रावधान क्यों महत्वपूर्ण है?

नई शिक्षा नीति 2020 का मुख्य उद्देश्य छात्रों पर परीक्षा का बोझ कम करना और रटंत आधारित शिक्षा की जगह समझ-आधारित मूल्यांकन को बढ़ावा देना है। नीति में स्पष्ट रूप से सिफारिश की गई है कि बोर्ड परीक्षाएं साल में कम से कम दो बार आयोजित की जाएं, ताकि छात्र अपना सर्वश्रेष्ठ स्कोर रख सकें।

यह बदलाव छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर किया गया है। एक बार की हाई-स्टेक परीक्षा की वजह से होने वाला तनाव अब कम होगा। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इसे "छात्र-केंद्रित दृष्टिकोण" बताया है, जो वैश्विक शिक्षा प्रथाओं से मेल खाता है।

CBSE का नया सिस्टम कैसे काम करेगा?

CBSE ने 2025 में इस योजना के लिए ड्राफ्ट और गाइडलाइंस जारी कीं। मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • कब लागू होगा? शैक्षणिक सत्र 2025-26 से, यानी पहली परीक्षा फरवरी 2026 में और दूसरी मई 2026 में।
  • पहली परीक्षा अनिवार्य: फरवरी में होने वाली मुख्य परीक्षा सभी छात्रों के लिए जरूरी होगी।
  • दूसरी परीक्षा वैकल्पिक: मई में होने वाली परीक्षा सुधार के लिए होगी। छात्र अधिकतम तीन विषयों में सुधार के लिए बैठ सकते हैं।
  • सर्वश्रेष्ठ स्कोर गिना जाएगा: दोनों परीक्षाओं में से बेहतर स्कोर को अंतिम मार्कशीट में शामिल किया जाएगा।
  • आंतरिक मूल्यांकन: स्कूल-आधारित आंतरिक परीक्षा सिर्फ एक बार होगी।
  • कक्षा 12वीं के लिए: फिलहाल मुख्य फोकस कक्षा 10 पर है, लेकिन भविष्य में कक्षा 12 के लिए भी इसी तरह के बदलाव की संभावना है।

CBSE के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने कहा कि यह बदलाव छात्रों को लचीलापन देगा और परीक्षा को कम तनावपूर्ण बनाएगा।

छात्रों को क्या फायदे होंगे?

  1. तनाव में कमी: एक गलती से सब कुछ खत्म होने का डर नहीं रहेगा।
  2. बेहतर प्रदर्शन का मौका: अगर पहली परीक्षा में कम नंबर आएं, तो दूसरी में सुधार कर सकेंगे।
  3. समझ पर जोर: परीक्षाएं अब अधिक कॉम्पिटेंसी-बेस्ड होंगी, यानी MCQ और वर्णनात्मक प्रश्नों से अवधारणाओं की जांच होगी।
  4. समग्र विकास: NEP के तहत स्किल-बेस्ड शिक्षा पर फोकस, जैसे क्लास 6 से वोकेशनल ट्रेनिंग।

2026 में लगभग 26-30 लाख छात्र इस नए सिस्टम से लाभान्वित होंगे।

राज्य बोर्ड भी कर रहे अनुसरण

CBSE के अलावा कई राज्य बोर्डों ने भी NEP के अनुरूप बदलाव शुरू किए हैं:

  • मध्य प्रदेश और गुजरात ने कक्षा 10 और 12 के लिए दो बार परीक्षा का मॉडल अपनाया है।
  • अन्य राज्य जैसे छत्तीसगढ़ भी इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

यह बदलाव पूरे देश में शिक्षा को अधिक समावेशी और छात्र-अनुकूल बना रहा है।

अभिभावकों और छात्रों के लिए सलाह

  • नियमित तैयारी जारी रखें, क्योंकि सिलेबस वही रहेगा।
  • CBSE की आधिकारिक वेबसाइट (cbse.gov.in) पर अपडेट चेक करते रहें।
  • मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें – योग, खेल और परिवार से बातचीत मददगार होगी।

यह सुधार भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। नई शिक्षा नीति छात्रों को न केवल परीक्षा पास करने वाला, बल्कि जीवन के लिए तैयार करने वाली बना रही है।

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(स्रोत: CBSE आधिकारिक घोषणाएं, शिक्षा मंत्रालय अपडेट 2025)

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Tag : News